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श्री डी के गोयल ने कहा कि गोरखपुर में लगने वाला परमाणु बिजली संयंत्र अति आधुनिक तकनीक से बनाया जाएगा

 
 
May 15, 2012

न्यूक्लियर पॉवर कारपरेशन ऑफ इंडिया के निदेशक श्री डी के गोयल ने आज कहा कि गोरखपुर में लगने वाला परमाणु बिजली संयंत्र अति आधुनिक तकनीक से बनाया जाएगा जिस पर सुनामी, तेज भूकंप आदि का कोई प्रभाव नहीं पडे़गा। श्री गोयल आज फतेहाबाद में विकिरण एवं कैंसर पर आयोजित एक वैज्ञानिक कार्यशाला में मीडिया कर्मियों को संबोधित कर रहे थे।  उन्होंने कहा कि गोरखपुर में लगने वाले परमाणु बिजली संयंत्र के बारे में लोगो में अनेक भ्रांतियां हैं और वे परमाणु संयंत्र की सुरक्षा को लेकर चितिंत हंै। उन्होंने कहा कि लोग रेडियेशन के दूष्प्रभावों के बारे में भी भ्रांतियां रखते हैं। उन्होंने कहा कि मानव शरीर के साथ-साथ दुध, चावल, मिट्टी, दाल, फल सहित सभी वस्तुएं रेडियेशन छोड़ती हंै। समुद्र तल पर सबसे कम रेडियेशन होता है और जैसे जैसे ऊंचाई बढ़ती जाती है रेडियेशन की मात्रा बढ़ती जाती है। उन्होंने कहा कि इन सब भ्रांतियों के निदान के लिए एनपीसीआईएल ने रेडियेशन व कैंसर विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया है। इस प्रकार की संगोष्ठियां अन्य वर्र्गाें के  लिए भी आयोजित की जाएंगी ताकि जनता परमाणु के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें। श्री गोयल ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने इलाके की भौगोलिक व अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही इस संयंत्र का डिजाईन तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि देश में बिजली उत्पादन के लिए परमाणु संयंत्र अति जरूरी है। कोयला और तेल सीमित मात्रा में उपलब्ध है , जो कभी भी खत्म हो सकते हंै। पवन व सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन करना काफी मंहगे के साथ साथ टिकाऊ भी नहीं है। ऐसे में परमाणु बिजली घर ही एक मात्र बिजली उत्पादन के अच्छे स्त्रोत हैं। श्री गोयल ने बताया कि देश में चल रहे सभी परमाणु बिजली संयंत्र पूरी तरह से सुरक्षित हैं और आस पास रहने वाले लोगों के जीवन पर कोई दूष्प्रभाव भी नहीं छोड़ते । जहां परमाणु संयंत्र लगे है वहां के लोगांे के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार आया है। आजीविका में बढ़ोतरी हुई है। जीवन सुगम व सरल हुआ है। उन्होंने कहा कि सुरत में लगे परमाणु बिजली संयंत्र की बढ़ोतरी की जा रही है। इसके साथ-साथ राजस्थान के रावतभाटा में लगे परमाणु बिजली संयंत्र का विस्तार किया जा रहा है। प्लांट में छः युनिट कार्य कर रही हैं। दो नई युनिट लगाई जा रही हंै। उन्होंने मीडिया कर्मियों से कहा कि वे अपनी लेखनी के माध्यम से आम आदमी को परमाणु ऊर्जा के फायदों के बारे में बताये। संगोष्ठी में बोलते हुए एनपीसीआईएल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एस के जैन ने कहा कि परमाणु बिजली संयंत्र में काम करने वाले  कर्मचारियों व इसके आस पास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर परमाणु विकिरणों का कोई असर देखने में नहीं आया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कैंसर की जांच के लिए किए जाने वाले सीटी स्कैन में रेडियेशन का खतरा अगर 100 प्वांइट है तो परमाणु संयंत्र में यह केवल एक प्वांइट है। डा. जैन ने कहा कि परमाणु के बारे में लोगों में वास्तविक जानकारी का अभाव है। उन्हांेने कहा कि हर गंभीर से गंभीर बीमारी का ईलाज रेडियेशन से ही संंभव है। कैंसर जिसका एक प्रमुख उदाहरण है। टाटा स्मारक केन्द्र की प्राध्यापिका डा. सरबानी लसकर ने कहा कि जहंा जहां परमाणु बिजली संयंत्र लगाये जाते है वहंा रहने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य, आजीविका, रोजगार सहित अन्य जानकारियां एकत्र की जाती है। परमाणु संयंत्र लगने के बाद भी सर्वे किया जाता है। सर्वे में पाया गया है कि परमाणु संयंत्र लगने के बाद लोगांे के जीवन स्तर में सुधार आया है। उन्होंने क हा कि गोरखपुर में लगने वाले प्लांट के लिए भी सर्वे का कार्य किया गया है।  मुख्य अभियंता एचआर भाट ने विस्तार से रेडियेशन के उदगम स्त्रोत व उसके प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंेने कहा कि पूरी दूनिया में कैंसर के मामले में हमारा देश काफी नीचे है। यहां कैसर से प्रभावित लोगों की संख्या काफी कम है जबकि विकसित देशों में कैंसर पीडि़तों की संख्या बहुुत ज्यादा है। उन्होंने कहा कि समुद्र के किनारे रेडियेशन का सबसे कम प्रभाव देखने में आया है। हवाई जहाज में सफर करते समय व्यक्ति  को 15 गुणा अधिक रेडियेशन का सामना करता पड़ता है। उन्होंने कहा कि परमाणु संयंत्र एक सुरक्षित तकनीक से लगाये जाते है। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व के प्रांतो में कैंसर क ा प्रभाव अधिक है जबकि वहां पर कोई भी परमाणु बिजली संयंत्र नहीं लगा है। श्री भाट ने कहा कि प्रकृति से हमें हर वर्ष लगभग तीन हजार माइक्रोसेवरड रेडियेशन मिलते है जबकि परमाणु से केवल 0.03 माइक्रोसेवरड रेडियेशन मिलती है। उन्होंने  कहा कि मानव शरीर मंे पोटेशियम, रेडियम प्राकृतिक रूप से विद्यमान रहते है जो कि लगातार रेडियेशन छोड़ते है। इस अवसर पर गोरखपुर परमाणु बिजली संयंत्र के मुख्य परियोजना अभियंता श्री टी आर अरोड़ा ने विस्तार से परमाणु बिजली संयंत्र की कार्यप्रणाली एवं प्रभाव की जानकारी दी। उन्हांेने गोरखपुर में लगने वाले परमाणु बिजली संयंत्र की आधुनिक तकनीक के बारे में भी जानकारी दी। इस मौके पर परियोजना प्रबंधक एवं अपरमुख्य अभियंता श्री एस के गुमास्ता ने सभी अतिथियों व मीडिया कर्मियों का धन्यवाद किया। निगम संचार के अपर महाप्रबंधक श्री सुदेश शर्मा ने उपकरण के माध्यम से विकिरणों की उपस्थिति के बारे में जानकारी दी।

 
 


 

 

 

 

 

 

 

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